”मैं” और ”परछाई”

”मैं” और ”परछाई”

अक्सर बातें करते हैं ।
मेरी तन्हाई का,
सबसे बड़ा साथी है ।

हाँ ! मेरी परछाई……

ये अज़ब-गज़ब है,
उजाले में भाग जाता,
पर, अँधेरे में,…
साथ निभाता है ।
हाँ ! मेरी परछाई……

हर्ष-उल्लास,
दर्द-ग़म,
हर सम-विषम-
परिस्थिति में..!
शांत चित्त, गहन मुद्रा में,
सोचता रहता है ।
मेरे हर क्रिया-कलापों को,
देखता रहता है ।
हाँ ! मेरी परछाई……

अब तो !
बात करना भी सीख गया हूँ ।
हर अच्छे-बुरे में,
ये फ़र्क भी बताने लगा है ।
हाँ ! मेरी परछाई……
–अभिषेक कुमार झा ”अभी”
+91-9953678024
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21 विचार “”मैं” और ”परछाई”&rdquo पर;

  1. पिगबैक: ”मैं” और ”परछाई” | kamdardnk

  2. बड़ी अजब गजब है ये मेरी परछाईं… 🙂
    उजाले में भाग जाता,
    पर, अँधेरे में,…
    साथ निभाता है ।
    हाँ ! मेरी परछाई…

    हर अच्छे-बुरे में,
    ये फ़र्क भी बताने लगा है ।
    हाँ ! मेरी परछाई…… बहुत सुन्दर परछाईं …

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