”गुरु देवाय नमः”

''गुरु देवाय नमः''

मात-पिता से बढ़कर मान
गुरु प्रत्यक्ष, हैं भगवान् ।
कितने बड़े भी हो जाएँ,
सम्मुख ना हो अभिमान ।

गुरु हैं दीया, गुरु हैं बाती,
गुरु ही हैं, प्रकाश्यमान ।
मन से करते, तृष्णा का नाश,
ये जब देते, हैं दिव्य ज्ञान ।

मात-पिता से बढ़कर मान
गुरु प्रत्यक्ष, हैं भगवान् ।

गुरु ही नैया, गुरु ही नाविक,
गुरु ही करते भँवर से पार ।
इनपे जब पूर्ण आस्था होता,
कहीं भी हो जाते उदयमान ।

मात-पिता से बढ़कर मान
गुरु प्रत्यक्ष, हैं भगवान् ।

एकलव्य सा शिष्य बने, तो
गुरु, द्रोणाचार्य का मान बढ़े…
धर अंगूठा गुरु चरणों में,
बारम्बार प्रणाम करें…….।

ऐसे हम भी शिष्य बने,
जिससे बढ़े गुरु का मान ।
मात-पिता से बढ़कर मान
गुरु प्रत्यक्ष, हैं भगवान् ।

–अभिषेक कुमार झा ”अभी”
+91-9953678024

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10 विचार “”गुरु देवाय नमः”&rdquo पर;

    • रचना को सराहने और हमें प्रोत्साहित प्रदान करने हेतु,
      आदरणीय ”साधना” जी, हृदय के अंतःकरण से धन्यवाद।

      आगे भी ऐसे मार्गदर्शन कर, प्रोत्साहित करते रहेंगे,
      ये मेरा विश्वास है।
      सादर

    • रचना को सराहने और हमें प्रोत्साहित प्रदान करने हेतु,
      आदरणीय ”वसुंधरा पाण्डेय” जी, हृदय के अंतःकरण से धन्यवाद।

      आगे भी ऐसे मार्गदर्शन कर, प्रोत्साहित करते रहेंगे,
      ये मेरा विश्वास है।
      सादर

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