यथार्थ (दोहावली)

यथार्थ (दोहावली)

प्यार में है शक्ति बहुत, जो इसे अपनाए
सुख शांति से दिन बीते, मान यश वो पाए

उसका नाश होता ही, जिस मन छल समाए
नहि कपटी के घर वृद्धि, जितना ले कमाए

सारी दुनियाँ घूम के, निकट माँ के आए
माँ का स्पर्श पाते ही, सब थकन मिट जाए

जिस मन सच का वास हो, वहाँ राम समाए
मनुज विजय आराम से, हर विध्न पे पाए

काम आए दोस्त जब, दुश्मन क्यूँ बनाए
कहत अभी ये जान ले, काम दोस्त आए

–अभिषेक कुमार झा ”अभी”
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